Tobacco Compensation Cess:क्या सिगरेट और अन्य तंबाकू उत्पादों पर टैक्स बढ़ने वाला है? क्या इन उत्पादों के दाम में इजाफा होगा? ये प्रश्न इसलिये उठ रहे हैं क्योंकि केंद्र सरकार ने पान मसाला उत्पादों पर नया उपकर लगाने संबंधी विधेयक पेश किया है। संसद के शीतकालीन सत्र के पहले दिन, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने लोकसभा में तंबाकू और उससे संबंधित उत्पादों पर उत्पाद शुल्क लगाने और पान मसाला के निर्माण पर नए उपकर का प्रस्ताव करने संबंधी दो विधेयक प्रस्तुत किए। यह उपकर, तंबाकू जैसे हानिकारक उत्पादों पर मौजूदा जीएसटी क्षतिपूर्ति उपकर की जगह लेगा।
केंद्रीय उत्पाद शुल्क (संशोधन) विधेयक, 2025, जीएसटी क्षतिपूर्ति उपकर की जगह लेगा, जो कि वर्तमान में सिगरेट, चबाने वाले तंबाकू, सिगार, हुक्का, जर्दा और सुगंधित तंबाकू जैसे सभी तंबाकू उत्पादों पर लागू होता है।
सरकार ने यह कानून लाने का निर्णय क्यों लिया है?
इस विधेयक का मुख्य उद्देश्य यह है कि “जीएसटी क्षतिपूर्ति उपकर के समाप्त होने के बाद, तंबाकू और तंबाकू उत्पादों पर केंद्रीय उत्पाद शुल्क की दरें बढ़ाने के लिए सरकार को राजकोषीय गुंजाइश उपलब्ध कराना है।” यह विधेयक स्वास्थ्य सुरक्षा और राष्ट्रीय सुरक्षा दोनों के संदर्भ में उपायों का विस्तार करेगा, विशेषकर पान मसाला जैसे विशिष्ट उत्पादों के लिए।
नई दरें कब लागू होंगी?
Tobacco Compensation Cess:क्षतिपूर्ति उपकर के समाप्त होने के बाद, तंबाकू और उससे संबंधित उत्पादों पर 40 प्रतिशत जीएसटी और उत्पाद शुल्क लागू होगा। पान मसाले पर भी 40 प्रतिशत जीएसटी और स्वास्थ्य सुरक्षा से संबंधित राष्ट्रीय सुरक्षा उपकर लगाया जाएगा। केंद्रीय उत्पाद शुल्क संशोधन विधेयक में यह प्रस्तावित किया गया है कि सिगार, चुरूट और सिगरेट पर प्रति 1,000 स्टिक के लिए उत्पाद शुल्क 5,000 रुपये से बढ़ाकर 11,000 रुपये तक किया जाएगा। साथ ही, अनिर्मित तंबाकू पर 60-70 प्रतिशत और निकोटीन तथा साँस लेने वाले उत्पादों पर 100 प्रतिशत उत्पाद शुल्क लगाए जाने का प्रावधान भी है।
