
छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने इस सप्ताह राज्य में लगातार बढ़ रही सड़क पर स्टंटबाज़ी, ट्रैफिक नियमों की अनदेखी और हाईवे पर जन्मदिन मनाने जैसी घटनाओं पर तीखी टिप्पणी की है। कोर्ट ने कहा कि “राज्य प्रशासन अमीर और प्रभावशाली लोगों की ऐसी हरकतों पर बेबस और नाकाम दिखाई दे रहा है”
दो ताज़ा मामलों पर स्वतः संज्ञान
मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा और न्यायमूर्ति बिभु दत्ता गुरु की खंडपीठ ने दो हालिया घटनाओं का संज्ञान लिया—
1. बिलासपुर रिवर व्यू इलाका:
एक युवक कार की बोनट और छत पर बैठकर स्टंट कर रहा था। वायरल वीडियो में वह खुद को “प्रभावशाली” बताते हुए कह रहा था कि उसे कोई नहीं रोक सकता, RaipurRaipur Raiपुलिस ने उसके खिलाफ तलाशी अभियान शुरू कर दिया है.
2. कोरिया जिले में BMO का जन्मदिन हाईवे पर:
सोनहत के ब्लॉक मेडिकल ऑफिसर डॉ. अनित बख्ला ने राष्ट्रीय राजमार्ग-43 पर केक काटकर और पटाखे फोड़कर जन्मदिन मनाया, जिससे आवागमन में बाधा हुई.
Chhattisgarh High Court Expresses Strong Displeasure Over Road Hooliganism
कोर्ट ने प्रशासन की लापरवाही पर सवाल उठाए :
हाईकोर्ट ने कहा कि सड़क पर गुंडागर्दी और हाईवे पर पार्टी करने जैसी घटनाएँ ज़्यादातर रईस और प्रभावशाली लोगों द्वारा की जाती हैं, जो खुलेआम कानून तोड़ते हैं.
कोर्ट ने विशेष रूप से बताया कि BMO जैसे जिम्मेदार अधिकारी की हरकत भी गंभीर है, और राज्य सरकार ने शुरू में उनसे जरूरत से ज्यादा नरमी बरती.
अदालत ने यह भी कहा कि पहले दिए गए सरकारी निर्देश “सिर्फ कागज़ों तक सीमित” हैं और ज़मीन पर अमल बहुत कम है.
सरकार की तरफ़ से पेश रिपोर्ट :
उप महाधिवक्ता शशांक ठाकुर ने अदालत को बताया—
अब तक ऐसी 14 घटनाएँ सामने आ चुकी हैं, और सभी में वाहनों की जब्ती की कार्रवाई की गई है.
बिलासपुर केस में भी FIR दर्ज कर वाहन ज़ब्त किया गया है.
कोरिया वाले मामले में डॉ. बख्ला के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धाराएँ 285, 288, 3(5) और मोटर वाहन अधिनियम-1988 की धारा 122 व 177 के तहत FIR दर्ज हुई है.
उनका वाहन अभी ज़ब्त नहीं हो पाया क्योंकि वे बाहर हैं, लेकिन SHO ने उन्हें बुलावा भेज दिया है और जल्द वाहन जब्त होगा.
कड़ी चेतावनी :
हाईकोर्ट ने राज्य से कहा कि बिना किसी पद या रसूख के फर्क किए, सभी दोषियों पर सख्त और तुरंत कार्रवाई की जाए.
कोर्ट ने चेतावनी दी कि यदि प्रशासन इसी तरह लाचार और ढीला रवैया दिखाता रहा, तो कोर्ट को कठोर आदेश जारी करने पड़ेंगे.
