New Labour Codes:अप्रैल 2026 से नए कोड पूरी तरह लागू हो जाएंगे। चारों कोड 21 नवंबर को अधिसूचित किए जा चुके हैं। उन्होंने बताया कि श्रम एक समवर्ती विषय है, इसलिए राज्यों को भी अपने स्तर पर अधिसूचना जारी करनी होगी। स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार वे नियमों में आवश्यक बदलाव कर सकते हैं।
चार लेबर कोड्स कौन से हैं
- कोड ऑन वेजेस 2019
- इंडस्ट्रियल रिलेशंस कोड 2020
- कोड ऑन सोशल सिक्योरिटी 2020
- ऑक्यूपेशनल सेफ्टी, हेल्थ एंड वर्किंग कंडीशंस कोड 2020
*29 पुराने कानूनों को मिलाकर बनाए गए 4 नए कोड*
केंद्र सरकार लंबे समय से लेबर कानूनों को सरल बनाने की कोशिश कर रही थी। पहले कुल 29 अलग-अलग केंद्रीय श्रम कानून थे, जिससे काफी उलझन पैदा होती थी। अब इन्हें समेकित करके चार कोड बनाए गए हैं—
कोड ऑन वेजेज, इंडस्ट्रियल रिलेशंस कोड, सोशल सिक्योरिटी कोड और ऑक्यूपेशनल सेफ्टी, हेल्थ एंड वर्किंग कंडीशंस कोड।ये कोड 2020 में पारित किए गए थे, लेकिन नियम बनने में देरी हुई। अब राज्यों को भी अपने नियम इन्हीं कोड्स के अनुसार अपडेट करना होगा। लेबर मंत्रालय का कहना है कि इससे बिजनेस आसान होगा और वर्कर्स के अधिकार मजबूत बनेंगे। अप्रैल 2025 से ये पूरे देश में लागू होंगे, जिससे 50 करोड़ से ज्यादा मजदूरों को लाभ मिलेगा।
*ग्रेच्युटी में बड़ा बदलाव*
- सबसे महत्वपूर्ण बदलाव ग्रेच्युटी में है। अब कर्मचारी को 5 साल की जगह सिर्फ 1 साल की सेवा पर भी ग्रेच्युटी मिलेगी।
•टैक्स-फ्री ग्रेच्युटी की सीमा 10 लाख से बढ़ाकर 20 लाख रुपए कर दी गई है।
•यह राशि पूरी तरह टैक्स मुक्त रहेगी।
•नियोक्ता को ग्रेच्युटी 30 दिनों के भीतर देना अनिवार्य होगा; देरी होने पर 10% सालाना ब्याज लगेगा और मुआवजा भी बढ़ सकता है।
•यह नियम सरकारी और निजी दोनों क्षेत्रों पर लागू
होगा।
*ओवरटाइम के नियम सख्त*
अब 9 घंटे (या सप्ताह में 48 घंटे) से ज्यादा काम पर डबल ओवरटाइम मिलेगा।
ओवरटाइम केवल आपात स्थिति में ही अनिवार्य होगा।
वर्कर्स चाहें तो पैसे की बजाय कंपेंसेटरी ऑफ भी ले सकते हैं।
सप्ताह में एक छुट्टी आवश्यक होगी।
इससे गैर-जरूरी ओवरटाइम कम होगा और मजदूरों की कमाई बढ़ेगी।
*छुट्टियों में बड़ा अपडेट*
हर 20 दिन काम पर 1 दिन की पेड लीव मिलेगी।
अर्न्ड लीव 15 से बढ़ाकर 30 दिन सालाना की गई है।
मैटरनिटी लीव 12 हफ्तों से बढ़ाकर 26 हफ्ते कर दी गई है।
पहली बार 15 दिन की पैटरनिटी लीव भी शामिल की गई है।
फिक्स्ड-टर्म कर्मचारियों को भी परमानेंट कर्मचारियों जैसे लाभ मिलेंगे।
*सोशल सिक्योरिटी को मजबूत किया गया*
एम्प्लॉयर को वेज का 0.65% ईडीएलआई स्कीम में जमा करना होगा, जिससे लाइफ और डिसेबिलिटी कवर मिलेगा।पहली बार गिग वर्कर्स (जैसे–ऑनलाइन ड्राइवर, डिलीवरी बॉय) को भी सोशल सिक्योरिटी और इंश्योरेंस का लाभ मिलेगा।दुकानों व प्रतिष्ठानों के लिए ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन जरूरी होगा; उल्लंघन पर 5 लाख तक का जुर्माना लगेगा।
नए कोड लागू होने से क्या फायदा होगा?
मजदूरों की कमाई, सुरक्षा और सुविधाएं बढ़ेंगी।
ग्रेच्युटी और ओवरटाइम से अतिरिक्त आय होगी।
मैटरनिटी-पैटरनिटी लीव से परिवार संग समय मिल सकेगा।
कंपनियों पर कंट्रीब्यूशन बढ़ने से लागत बढ़ेगी, लेकिन इससे जॉब क्रिएशन भी बढ़ेगा।
चार महीने में राज्यों को नियम बनाने होंगे।
एक्सपर्ट्स का मानना है कि ये कोड भारत को ग्लोबल लेबर स्टैंडर्ड के करीब ले जाएंगे।
1 साल की नौकरी पर कितनी ग्रेच्युटी मिलेगी?
फॉर्मूला वही रहेगा—
ग्रेच्युटी = अंतिम बेसिक सैलरी × (15/26) × कुल सेवा (साल में)
उदाहरण:
यदि अंतिम बेसिक वेतन 50,000 रुपए है और कर्मचारी ने 1 साल काम किया है—
50,000 × (15/26) × 1 = 28,847 रुपए
यानी कर्मचारी को लगभग 28,800 रुपए की ग्रेच्युटी मिलेगी।
ग्रेच्युटी क्या है?
New Labour Codes:यह एक सर्विस-आधारित वित्तीय लाभ है, जिसे नियोक्ता कर्मचारियों को सम्मानस्वरूप देता है। यह आपकी सेवा अवधि और वेतन पर आधारित होती है।
