Banking Reform 2025:सरकार एक बार फिर बैंकिंग सेक्टर में बड़े स्तर पर बदलाव की तैयारी कर रही है। वित्त मंत्रालय नए मेगा मर्जर मॉडल पर काम कर रहा है, जिसके तहत देश के कई सरकारी बैंकों को आपस में मिलाकर बड़ी संस्थाओं में बदलने की योजना प्रस्तावित है। इस कदम के लागू होने के बाद भारत में सिर्फ चार बड़े पब्लिक सेक्टर बैंक (PSBs) ही रह जाएंगे।
क्यों हो रहा है यह मेगा मर्जर?
सरकार का मानना है कि छोटे और मध्यम आकार के सरकारी बैंकों को मिलाकर बड़े कॉर्पोरेट स्तर के बैंक तैयार किए जा सकते हैं। इससे—
•पूंजी की मजबूती बढ़ेगी
•विदेशी बाजारों में प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी
•NPA और जोखिम प्रबंधन आसान होगा
•डिजिटल बैंकिंग क्षमताएँ मजबूत होंगी
•लागत घटेगी और सेवा गुणवत्ता बढ़ेगी
पिछले कुछ वर्षों में स्टेट बैंक, बैंक ऑफ बड़ौदा और कई अन्य सरकारी बैंकों में बड़े मर्जर सफल रहे हैं, जिसके बाद सरकार का फोकस अब सेक्टर को और मजबूती देने पर है।
कौन-कौन से बैंक हो सकते हैं मर्ज?
अभी आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है, लेकिन सूत्रों के अनुसार जिन बैंकों के नाम चर्चा में हैं, उनमें शामिल हैं—
•पंजाब एंड सिंध बैंक
•यूको बैंक
•इंडियन ओवरसीज बैंक
•सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया
•बैंक ऑफ महाराष्ट्र
•पंजाब नेशनल बैंक (PNB) समूह
•यूनियन बैंक समूह
इनमें से छोटे और कमजोर बैंकों को बड़े व मजबूत सरकारी बैंकों में जोड़ा जा सकता है। वित्त मंत्रालय ऐसी संरचना बनाने की दिशा में काम कर रहा है, जिसमें देश में 3–4 मेगा PSB हों, जो अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की वित्तीय ताकत को दर्शाएं।
लोगों पर क्या असर पड़ेगा?
आम ग्राहकों पर इसका सीधा नकारात्मक असर नहीं पड़ेगा। बल्कि—
•शाखाएँ कम होने के बजाय अधिक सुव्यवस्थित होंगी
•डिजिटल सर्विसेज मजबूत होंगी
•ATM, UPI और बैंकिंग नेटवर्क एक समान चलेगा
•लोन प्रोसेस तेज़ और आसान हो सकता है
हाँ, कुछ बैंकों के नाम और IFSC कोड बदल सकते हैं, लेकिन यह प्रक्रिया पहले की तरह चरणबद्ध होगी।
सरकार जल्द कर सकती है घोषणा
Banking Reform 2025:मर्जर प्रस्ताव को लेकर मंत्रालय में उच्च-स्तरीय बैठकें जारी हैं। अनुमान है कि इस पर जल्दी ही आधिकारिक बयान आ सकता है।
