Government Orders:साइबर सुरक्षा को मजबूत करने और मोबाइल डिवाइस की वैधता की पुष्टि के उद्देश्य से दूरसंचार मंत्रालय ने सभी मोबाइल फोन कंपनियों को निर्देश दिया है कि वे अपने नए हैंडसेट में ‘संचार साथी’ ऐप को अनिवार्य रूप से शामिल करें। इतना ही नहीं, विदेशों से आयात होकर आने वाले नए मोबाइल फोन में भी यह ऐप प्री-इंस्टॉल होना जरूरी होगा।
*मंत्रालय के निर्देश*
मंत्रालय ने कंपनियों को यह भी कहा है कि जैसे मोबाइल में सॉफ्टवेयर अपडेट आते हैं, उसी तरह संचार साथी ऐप का ऑटो-अपडेट सिस्टम भी उपलब्ध होना चाहिए। संचार साथी पोर्टल 2023 में शुरू हो गया था, जबकि इसका मोबाइल ऐप इस साल जनवरी में लॉन्च किया गया था, जिसमें उपभोक्ताओं को कई महत्वपूर्ण फीचर्स दिए गए हैं।
मोबाइल चोरी होने पर शिकायत दर्ज करने से लेकर फोन की वैधता की जांच तक—यह सब ऐप के माध्यम से संभव है। मंत्रालय का कहना है कि इस साल अक्टूबर में संचार साथी की मदद से 50,534 चोरी हुए फोन वापस मिले, जो जून में रिकवर हुए फोन की संख्या से 47% ज्यादा है।
जून में 34,339 फोन वापस मिले थे, जबकि अगस्त में यह आंकड़ा 45,243 था। मंत्रालय का दावा है कि इस प्लेटफॉर्म के जरिए हर मिनट एक खोया या चोरी हुआ फोन बरामद हो रहा है। इसके अलावा उपयोगकर्ता यह भी चेक कर सकते हैं कि उनका फोन कहीं चोरी का तो नहीं है।
यह ऐप यह भी बताता है कि किसी व्यक्ति के नाम पर कितनी सिम कार्ड सक्रिय हैं। मंत्रालय के अनुसार अब तक संचार साथी की मदद से 42 लाख से अधिक मोबाइल फोन ब्लॉक किए जा चुके हैं। कई लोग सेकेंड हैंड मोबाइल खरीदते समय फोन की विश्वसनीयता की पुष्टि इसी ऐप से कर सकते हैं।
किस पर आती है जिम्मेदारी?
अक्सर देखा जाता है कि किसी के नाम पर फर्जी तरीके से सिम जारी कर दी जाती है और उसका उपयोग गलत गतिविधियों में होता है। ऐसी स्थिति में पुलिस पूछताछ उसी व्यक्ति से करती है जिसके नाम पर सिम रजिस्टर्ड है, और उसे ही दोषी माना जाता है।
Government Orders:संचार साथी ऐप की मदद से आसानी से यह पता लगाया जा सकता है कि आपके नाम पर बिना जानकारी कोई सिम तो जारी नहीं की गई। यदि ऐसा है, तो आप उसे तुरंत ब्लॉक करवा सकते हैं।
